Thursday, November 29, 2018

क्या हम मिलकर 'बलात्कार की संस्कृति' को सींच रहे हैं?

अब सवाल ये है कि क्या हम एक समाज के तौर पर बलात्कारयों के साथ खड़े हैं? क्या हम व्यक्तिगत तौर पर कहीं न कहीं बलात्कारियों से सहानुभूति रखते हैं? क्या हम बलात्कार का दोष किसी न किसी तरीके से पीड़िता पर डालने की कोशिश करते हैं?

इन सारे सवालों का जवाब है- हां.

'रेप कल्चर' यानी 'बलात्कार की संस्कृति' दुनिया के तक़रीबन हर हिस्से और हर समाज मेंकिसी न किसी रूप में मौजूद है.

बलात्कार की संस्कृति. रेप कल्चर.

ये शब्द सुनने में अजीब लगेंगे क्योंकि संस्कृति या कल्चर को आम तौर पर पवित्र और सकारात्मक संदर्भ में देखा जाता है. लेकिन संस्कृति या कल्चर सिर्फ़ ख़ूबसूरत, रंग-बिरंगी और अलग-अलग तरह की परंपराओं और रीति-रिवाजों का नाम नहीं है.

संस्कृति में वो मानसिकता और चलन भी शामिल है जो समाज के एक तबके को दबाने और दूसरे को आगे करने की कोशिश करते हैं. संस्कृति में बलात्कार की संस्कृति भी छिपी होती है जिसका सूक्ष्म रूप कई बार हमारी नज़रों से बचकर निकल जाता है और कई बार इसका भद्दा रूप खुलकर हमारे सामने आता है.

क्या है रेप कल्चर?
'रेप कल्चर' शब्द सबसे पहले साल 1975 में प्रयोग किया गया जब अमरीका में इसी नाम की एक फ़िल्म बनाई गई. 70 के दशक में अमरीका में महिलावादी आंदोलन ( (सेकेंड वेव फ़ेमिनिज़्म) ज़ोर पकड़ रहा था और इसी दौरान 'रेप कल्चर' शब्द चलन में आया.

'रेप कल्चर' का मतलब उस सामाजिक व्यवस्था से है जिसमें लोग बलात्कार का शिकार होने वाली महिला का साथ देने के बजाय किसी न किसी तरीके से बलात्कारी के समर्थन में खड़े हो जाते हैं.
'रेप कल्चर' का मतलब उस परंपरा से है जिसमें औरत को ही बलात्कार के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.
'रेप कल्चर' उस संस्कृति का परिचायक है जिसमें बलात्कार और महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा को गंभीर अपराध के बजाय छोटी-मोटी और रोज़मर्रा की घटनाओं की तरह दिखाने की कोशिश की जाती है.

किसी समाज में या देश में 'रेप कल्चर' मौजूद है, ये साबित करना ज़्यादा मुश्किल नहीं है.

अगर भारत की बात करें तो ऊपरी तौर पर लग सकता है कि हम सब बलात्कार के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं, बलात्कारियों को सज़ा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं, औरतों के सम्मान और सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं...वगैरह-वगैरह.

इन बातों को पूरी तरह झुठलाया नहीं जा सकता लेकिन इनका दूसरा पक्ष भी है जो इनसे कहीं ज़्यादा मज़बूत है.

ये वो पक्ष है जो साबित करता है कि हम भी कहीं न कहीं बलात्कारियों के समर्थन में खड़े हैं और 'बलात्कार की संस्कृति' को सींचकर उसे ज़िदा रखने का अपराध कर रहे हैं.

इसका ताज़ा उदाहरण है कठुआ गैंगरेप मामला, जब अभियुक्तों के समर्थन में खुलेआम तिरंगा लहराया गया और नारे लगाए गए.

No comments:

Post a Comment